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AAP: Shades of AAM Drama ...

The Drama and Theatre of a Common Man, in pictures:

The Common Electrician !
Dramatic Press Conferences of the Commons !

Even this is so Common!
A Dip in Holy Ganges !

Meditating, after a real tight slap!
EPIC ! No Words to express !!

Let me go, Home!

Picture Credits: Internet. In case of any unintentional copyright violations, please inform the author and due Credits will be inserted or pictures removed on request. 

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धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद ...

इस ब्लॉगपोस्ट को हिंदी में लिखने का एक मुख्य कारण ये है कि इसका सीधा सम्बन्ध हम और हमारे अपने लोगों से है । इसे आगे पढ़ने से पहले आप से एक विनती है कि इसे आप किसी धर्म, जाति, संप्रदाय या विचारधारा के संकीर्ण लेंस से ना देखें । इसे केवल एक भारतीय नागरिक की नज़र से पढ़ें , जिसका केवल हिंदुस्तान और उसके संवैधानिक नागरिक होने के अलावा और कोई परिचय नहीं है । क्यूंकि यह एक गहरा विषय है और इस पर कोई भी टिप्पणी संक्षिप्त में करना मूर्खता होगी , इसीलिए हम इसे दो भागों में समझने की कोशशि करेंगे ।
तो पहले शुरू करते हैं , ये दो चार बड़े-बड़े शब्दों को लेकर आजकल जो ज़बरदस्त बहस चल रही है : धर्मनिरपेक्षता, असहिष्णुता और राष्ट्रवाद इत्यादि ... इस बहस के मुद्दे पर  कुछ विचार यहाँ साझा करने का प्रयत्न है।
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धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा शब्द है जिसकी संकल्पना आज शायद ही दुनिया के किसी और देश में संवैधानिक या सामाजिक रूप में देखने और सुनने को मिलेगी । ऐसा लगता है जैसे इस शब्द को अपने आप में पूर्ण रूप से लागू करने का सारा ठेका सिर्फ और सिर्फ भारतवर्ष ने ले लिया है । 
धर्मनिरपेक्षता एक बहुत बड़ा मज़ाक बन…

भूमंडलीकरण (Globalisation) और उसके तत्व ...

The best way to permanently enslave a people is  to replace their memories, their mythologies, their idioms ~ Sanjeev Sanyal

पिछले दो लेखों में हमने धर्मनिरपेक्षता के इतिहास और उसके भारतीय प्रसंग में सामाजिक उपयोगिता पर चर्चा की थी ।
इस लेख में हम कुछ पाश्चात्य शब्दावली के भारतीय परिवेश में राजनैतिक एवं सामाजिक उपयोग और प्रासंगिकता पर बात  करेंगे । ये एक बहुत तीखी लेकिन सरल टिपण्णी होगी, जिससे शायद सबका सहमत हो पाना नामुमकिन होगा - लेकिन "असहमति पर सहमति" का पालन करते हुए हम आगे बढ़ते हैं । 
हम बात कर रहे हैं कुछ ऐसे शब्दों की जो हमारे देश में पश्चिम सभ्यता से आयात किये गए हैं और अमूमन रोज़ाना अख़बार और टीवी के माध्यम से हमें इनकी काफी बड़ी मात्र में ख़ुराक़ मिलती रही है । बहुलवाद (Plularism), सहनशीलता (Tolerance), बहुसंस्कृतिवाद (Multiculturalism) , भूमंडलीकरण (Globalization) जैसे शब्द इसी शब्दावली के अंतर्गत आते हैं , मूलतः जिनका भारतीय सभ्यता से क़रीब ५००० साल पुराना रिश्ता है । 
इन शब्दावली को समझने के लिए हमें भूमंडलीकरण (Globalization) नाम के हाथी को समझना अति-आवश्यक ह…

Why are we so obsessed with GDP?

We have now sunk to a depth at which the restatement of the obvious is the first duty of intelligent men ~ George Orwell Reading habits are now limited to Pictorials & Meme shared over WhatsApp & Social Media. The daily dose of Newspaper headlines are remotely connected to the reality. Evening prime-time is spent on 'Newstainment' - the cacophony of futile & vile debates. New-age, so-called 'fact-checkers' are mostly 'Google Warriors' with hidden Agenda.
Facts & Data gets buried somewhere deep under all this rubble, crying for time & attention.
Two things happened last week to trigger a national rhetoric:  RBI released its Annual Report stating 99% of demonetised notes came backGDP growth slows to 5.7% in April-June 2017 Quarter Both have turned out to be highly emotive issues for India - for those who understand it and even for those who don't. Emotion, connects India.
'Designer Journalists' got busy drafting lengthy editorials, …