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Showing posts from April, 2016

The Arrogant Faketivists ...

An innocent tweet from Sanctuary Asia caught my attention: Sanctuary Asia on Twitter: "If PM Modi is serious about saving #India's #tigers, he must read this by Prerna Bindra https://t.co/Ve48NBTmHR" I went ahead and clicked the link, the headline of which I thought was in very poor taste, highly arrogant & toxic. Turned out exactly as expected. The headline was just to grab attention, get clicks & shares - it had nothing to do with contents of the article, moreover even contradictory. 
If Modi is serious about saving India's tigers, he must read this
The article, supposedly written by an 'award winning' journalist and a passionate 'Wildlife Conservationist',  was poor in content, completely devoid of key policy suggestions or path-breaking ideas, to help the cause of Tiger Conservation. Except quoting random cases and statistics of Tiger Casualties. There is no dearth of such data out there and a teenage intern would put out a better researche…

धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद ...

इस ब्लॉगपोस्ट को हिंदी में लिखने का एक मुख्य कारण ये है कि इसका सीधा सम्बन्ध हम और हमारे अपने लोगों से है । इसे आगे पढ़ने से पहले आप से एक विनती है कि इसे आप किसी धर्म, जाति, संप्रदाय या विचारधारा के संकीर्ण लेंस से ना देखें । इसे केवल एक भारतीय नागरिक की नज़र से पढ़ें , जिसका केवल हिंदुस्तान और उसके संवैधानिक नागरिक होने के अलावा और कोई परिचय नहीं है । क्यूंकि यह एक गहरा विषय है और इस पर कोई भी टिप्पणी संक्षिप्त में करना मूर्खता होगी , इसीलिए हम इसे दो भागों में समझने की कोशशि करेंगे ।
तो पहले शुरू करते हैं , ये दो चार बड़े-बड़े शब्दों को लेकर आजकल जो ज़बरदस्त बहस चल रही है : धर्मनिरपेक्षता, असहिष्णुता और राष्ट्रवाद इत्यादि ... इस बहस के मुद्दे पर  कुछ विचार यहाँ साझा करने का प्रयत्न है।
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धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा शब्द है जिसकी संकल्पना आज शायद ही दुनिया के किसी और देश में संवैधानिक या सामाजिक रूप में देखने और सुनने को मिलेगी । ऐसा लगता है जैसे इस शब्द को अपने आप में पूर्ण रूप से लागू करने का सारा ठेका सिर्फ और सिर्फ भारतवर्ष ने ले लिया है । 
धर्मनिरपेक्षता एक बहुत बड़ा मज़ाक बन…